प्रतियेक व्यक्ति सुख _एश्वर्य ,धन संपदा एवं निरोगी काया चाहता है इ उसकी एक कमाना पूरी होती है तो ,वह दूसरी कामना की और बढ जाता है इस प्रकार कामनाओ अर्थात इच्छाओ का कोई अंत नहीं ,किन्तु किसी इच्छा करने मात्र का नाम ही इच्छा शक्ति नही है ।इच्छा तो प्रतियेक व्यक्ति करता है -किन्तु उसकी पूर्ति करने के लिए कठोर परिश्रम आवश्यक होता है संकल्प आवश्यक होता है तभी इच्छा पूर्ति संभव होती है
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