Wednesday, September 28, 2011

श्री दुर्गादेवीकी विशेषताएं


सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते ।।
सर्व मंगलकारी वस्तुओं में विद्यमान मांगल्य रूप देवी, कल्याणदायिनी, सर्व पुरुषार्थों को साध्य कराने वाली, शरणागतों की रक्षा करने वाली देवी, त्रिनयना, गौरी, नारायणी ! आपको मेरा प्रणाम । श्री दुर्गादेवीके अतुलनीय गुणोंका परिचय इस श्लोकसे होता है । जीवनको परिपूर्ण बनाने हेतु आवश्यक सर्व विषयोंका साक्षात् प्रतीक हैं, आदिशक्ति श्री दुर्गादेवी । श्री दुर्गादेवीको जगत जननी कहा गया है । जगत्जननी अर्थात् सबकी माता ।

Saturday, September 24, 2011

मेरा आदर्श समाज

आप पूछ सकते हैं, यदि आप वर्ण और जाति नहीं चाहते, तो आपका आदर्श समाज क्‍या है। मैं कहूंगा, एक ऐसा समाज, जिसमें न्‍याय, बन्‍धुता, समता और स्‍वतंत्रता हो। मैं समझता हूं, किसी भी विचारवान को इससे इन्‍कार न होना चाहिए। बन्‍धुता का अर्थ यह है कि देश में उत्‍पन्‍न सभी व्‍यक्ति परस्‍पर भाई-भाई हैं और सभी का पिता की संपत्ति की भांति देश की संपत्ति पर समान अधिकार है। जीवन के लिए आवश्‍यक भोजन, वसन, औ‍षधि और शिक्षा के लिए सभी बराबर के हकदार हैं। इसी का नाम बन्‍धुता या भाईचारा है। इसका दूसरा नाम है जनतंत्र या लोकतंत्र।

शिक्षक का उत्तरदायित्व

शिक्षा निश्चय ही ऐसे आधार रख सकती हे जो की मनुस्य को स्वतंत्र बनाये और स्वयं को उपलब्ध व्यक्ति चाहिए |उसमे ही आशा हे उनमे ही भविष्य हे शिक्षा अनुशासन 
देने को नहीं ,आतम विवेक देने को हे |