आज से ईसा के ६०० वर्ष पूर्व ६वि शताब्दी में भारत में हिंसा , असत्य अनाचार ,शोषण का बोल बाला था इसे समय में भारत की विशाल नगरी वैशाली में पाप को हल्का करने का प्रयास किया गया .उन दिनों वैशाली में ,चेटक,नाम के राजा का शासन था चेटक की रूपवती पुत्रियों में से एक का नाम त्रिशला था त्रिशला का विवाह कुण्डलपुर के शासक राजा सिद्धार्थ से हुआ था एक दिन रानी त्रिशला अपने राज भवन में निंद्रा लीन थी तब रात्रि के अंतिम पहर में रानी को सोलह स्वप्नदिखाई दिए . इन स्वप्न को देख त्रिशला की नींद खुल गयी .वे सोचने लगी की एसा तो कभी नहीं हुआ ?प्रात:काल रात्रि के स्वप्न के विषय में राजा सिद्धार्थ ने सुना तो -वह भाव विभोर हो कहने लगे इस घर में महान विभूति का अवतार होने वाला है .हे त्रिशिले तुम बहुत भाग्य शाली हो नो मास की समाप्ति पर चेत्र शुक्ल त्रयोदशी के शुभ दिन वैशाली के कुंडलपुर ग्राम में रानी त्रिशला ने एक विभूति को जन्म दिया जिसने आगे चलकर विश्व धर्म की स्थापना की हिंसा को पराजित किया असत्य और अन्याय को हराया .ये विभूति थे -भगवान महावीर स्वामी .इनके जीवन की पञ्च स्थितिया -गर्भ ,जन्म , तप, घ्यान ,और निर्वाण आदि .पञ्च कल्याणक से जानी जाती है ...
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