आपको पता होगा की धार्मिक इतिहास में सेकड़ो उदाहरण है ,जब की पापी पल भर में पुण्य आत्मा हो गये है ।
इसका कुल कारन इतना हे की शक्तिया बहुत थी केवल ट्रांसफ़ोर्ममेशन रूपांतरण की बात थी शुभ सम्पर्क चाहिए
और सब बदल जायेगा ।अंगुलिमाल ने बहुत हत्याए की उसने एक हजार लोगो की हत्या करने का व्रत लिया था
उसने नो सो निन्यानवे लोगो की हत्या करके उनकी उंगलियों की माला पहन ली थी उसे आखरी आदमी चाहिए था बुद्ध उस रस्ते निकले जहा अंगुलिमाल रहता था गाव के लोगो ने कहा उधर मत जाइये आप निहत्ते भिक्षु है अंगुलिमाल आप की हत्या कर देगा बुद्ध ने कहा ,हम तो जो रास्ता चुनते हे उस पर चलते हे किसी कीवजह से
रास्ता नही बदलते और अगर अंगुलिमाल यहाँ है तो हमारी और भी जरुरत हो गयी है ।अब देखना यह है की वह
हमे मारता हे की हम उसको मारते हे अंगुलिमाल ने टेकडी नजर से देखा की एक निहत्ता भिक्षु _शांत _रस्ते -पर चला आ रहा हे उसने वही चिल्ला कर कहा देखो यहाँ मत आओ ।सिर्फ इसलिए कह रहा हु की तुम सन्यासी हो वापस लोट जाओ ।क्योकि हम किसी पर दया करने के आदि नहीं है बुद्ध ने कहा हम भी किसी की दया लेने के
आदि नहीं हे और जहा चुनोती हो वहा सन्यासी केसे पीछे लोटेगा ?अंगुलिमाल बहुत हैरान हुआ की यह आदमी तो पागल लगता हे उसने अपना फरशाउठाया और निचे उतरा तो बुद्ध ने उसे कहा इसके पहले की तुम मुझे मारोंएक छोटा सा कम करो यह सामने पैड हे उस पैड के चार पत्ते तोड़ दो उसने फरसे से मारा और डाल तोड़ दी और कहायह रहा चार के बदले चार हजार बुद्ध ने कहा अब एक छोटा और काम और करो ।इसके पहले की तुम
मुझे मारो ,इन पत्तियों को वापस इसी दरख़्त में जोड़ दो । अंगुलिमाल बोला यह यह मुश्किल है तो बुद्ध ने कहा तोड़ना तो बच्चा भी कर सकता हे जोड़ना जो करे उसमे ही पुरुष हे इसमे ही पुरषार्थ है तुम कजोर आदमी हो ।तुम यह ख्याल छोड़ दो की तुम शक्ति शाली हो उसने एक पल गोर से सोचा फिर कहा ,यह सही हे ।क्या पत्ता जोड़ने कोई रास्ता हो सकता है बुद्ध ने कहा हम उसी रास्ते पर चल रहे है और उसके स्वाभिमान को पहली दफे यह पता चला की मारने का कोई मतलब नहीं है में क्या करू ? बुद्ध ने कहा मेरे पीछे आओ ।अंगुलिमाल उस दिन भिक्षु हो गया I
मुझे मारो ,इन पत्तियों को वापस इसी दरख़्त में जोड़ दो । अंगुलिमाल बोला यह यह मुश्किल है तो बुद्ध ने कहा तोड़ना तो बच्चा भी कर सकता हे जोड़ना जो करे उसमे ही पुरुष हे इसमे ही पुरषार्थ है तुम कजोर आदमी हो ।तुम यह ख्याल छोड़ दो की तुम शक्ति शाली हो उसने एक पल गोर से सोचा फिर कहा ,यह सही हे ।क्या पत्ता जोड़ने कोई रास्ता हो सकता है बुद्ध ने कहा हम उसी रास्ते पर चल रहे है और उसके स्वाभिमान को पहली दफे यह पता चला की मारने का कोई मतलब नहीं है में क्या करू ? बुद्ध ने कहा मेरे पीछे आओ ।अंगुलिमाल उस दिन भिक्षु हो गया I
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