- हम ईश्वर को सर्व व्यापी मानकर उसके अनुशासन को अपने जीवन में उतारेगे ।
- शरीर को भगवान का मंदिर मानकर आत्म सयम और और नियमितता द्वारा आरोग्य की रक्षा करेगे ।
- मन को कुविचारो और दुर्भावनाओ से बचाए रखने के लिए स्वाध्याय एवं सत्संग की व्यवस्था करेगे ।
- मर्यादा का पालन करेगे वर्जनाओ से बचेगे एवं नागरिक कर्तव्य का पालन करेगे ।
- राष्ट्रीयएकता एवं समता के प्रति निष्ठां वान बने रहेगे जाती ,लिंग भाषा प्रान्त एवं सम्प्रदाय आदि के कारणपरस्पर कोई भेद भाव नहीं बरतेगे ।
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