कभी सोचा आपने

कभी सोचा आपने तो बहुत बाते हंसी -मजाक लगेगी की कोई नाक से साँस लेकर सोच रहा है की ब्रह्म ज्ञान हो जायेगा |ब्रह्म ज्ञान इतना सस्ता है ? तुम्हारी एक नाक से साँस लेने पर निर्भर है ? तुम बच्चो से बी गई बीती बाते कर रहे हो |बच्चे भी हंसेगे की नाक से साँस लेने पर कही ब्रह्मज्ञान होता है |तो दो नाक से लो तो दोहरा होगा |की तुम सिर के बल खड़े हो ,इससे क्या समाधी लग जायेगी |काश इतना आसान होता ,तो सारी पृथ्वी कभी सिर के बल खड़ी हो गयी होती  \और जब पैर के बल खड़े होने से समाधी नहीं लगी ,तो सिर के बल खड़े होने से केसे लग जायेगी ?नही लेकिन क्लिष्ट _कठिन को करने में ही रस आता है क्योकि कठिन जो दूसरे नहीं कर रहे है ,उसे करके अपने अहंकार को तृप्ति मिलती है |तुम कहते हो : देखो मेरी तरफ ,में सिर के बल खड़ा हू |तुम नहीं खड़े हो सकते हो ,घंटो लोग सिर के बल खड़े है ;उससे कोई मोक्ष नहीं मिलता केवल सिर के भीतर के बारीक़ तंतु टूट जाते है तुम्हारे लंबे शीर्षासन को नोबेल प्राइज नहीं मिलती ;मिल ही नहीं सकती |उनमे से एक भी बड़ा वैज्ञानिक नहीं होता न कोई पिकासो पैदा होता है न कोई आइंस्टीन ,पर शीर्षासन करने वालो में मंद बुध्धि वाले मिल जायेगे \क्योकि वैज्ञानिक कहते है की अगर खून अधिक मात्रा में मस्तिस्क में जायेगा तो तो उसके तंतु टूट जायेगे उतनी बड़ी उर्जा के बाढ़ को झेल नहीं पायगे और जितने तन्तु टूटेगे उतनी प्रज्ञा विकसित नहीं होगी इसीलिए तो जानवर बुध्धि में पिछड गए है कयोकि उनके शरीर में इंसान से जयादा खून जा रहा है कभी आपने पागल खाने जाकर देखा हो ,तो जो पागल है मंद बुध्धि है वे सदा सिर झुकाए मिलेगे दोनों पेरो के बिच अपना सिर झुकाकर बैठे मिलेगे उलटे सीधे आसान करने से परमात्मा नही मिलता सच पूछो तो परमात्मा से मिलाने के लिए कोई उपाय करना जरुरी नहीं कयोकि वह तो मिला हुआ है |तुम्हारे ह्रदय की धड़कन है तुम्हारे साँस की साँस है तम्हारे भीतर से देखता है वाही सुनता है वही चलता है पर यह तुम्हे तभी दिखाई पड़ेगा जब भय न हो और लोभ न हो |

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