साहस और धेर्य

साहस और धेर्य की सबसे लम्बी कहानी हे और मानवीय इंजन को चलाने   वाला पहिया हे  क्या यह विस्मय की बात नहीं हे की एक छोटे से दुर्बल शरीर में पहाड़ से भी 
बड़ी हिम्मत पाई जाये ?एक एसा शरीर जो अपने संकल्प को व्यावहारिक रूप न दे सकता हो  उसकी सहायता न कर सकता हो जो अपने मन की बात कहने में समर्थ न हो उसकी सहा यता न कर सकता हो  यह एक प्रकार का विनोद हे दुबले पतले शरीर के अन्दर इसी इच्छा हो अभिलाषा पाई जाये |जिसे पूरा करने की उस व्यक्ति में ताकत न हो |परन्तु यह हमारा दोष  होता हे हमारी अपनी त्रुटी का परिणाम होता हे परमात्मा ने हमे अतरिक्त शक्ति दी हे ताकि हम दुर्घटनाओ और रोगों  के आकस्मिक
आक्रमणों से अपनी रक्षा कर सके |

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